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6 साल बाद आया बड़ा फैसला! अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन समेत 5 दोषी करार, कोर्ट में फैसले के दौरान भावुक हुए आरोपी

 


उत्तर-पूर्वी दिल्ली में वर्ष 2020 के दंगों के दौरान हुई आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आखिरकार छह साल बाद अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने इस बहुचर्चित मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपितों को दोषी करार दिया है। अदालत का यह फैसला लंबे समय से चल रहे मुकदमे, सैकड़ों दस्तावेजों, गवाहों और विस्तृत सुनवाई के बाद आया है।

सोमवार को अदालत परिसर में सुबह से ही असामान्य हलचल देखी जा रही थी। मीडिया, वकील, पुलिसकर्मी, आरोपितों के परिजन और कोर्ट स्टाफ फैसले का इंतजार कर रहे थे। शाम करीब छह बजे जैसे ही अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने फैसला पढ़ना शुरू किया, कोर्ट कक्ष में पूरी तरह सन्नाटा छा गया।

फैसले के दौरान कोर्ट में पसरा सन्नाटा

दोपहर करीब दो बजे से ही अदालत परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। जिन आरोपितों को न्यायिक हिरासत में रखा गया था, उन्हें सुरक्षा के बीच अदालत में पेश किया गया। वहीं जमानत पर चल रहे अन्य आरोपित भी स्वयं अदालत पहुंचे।

करीब चार घंटे तक सभी की नजरें अदालत की कार्यवाही पर टिकी रहीं। शाम होते-होते अदालत ने अपना निर्णय सुनाना शुरू किया।

जैसे-जैसे न्यायाधीश आदेश पढ़ते गए, कोर्ट रूम में मौजूद सभी लोग ध्यानपूर्वक हर शब्द सुनते रहे। फैसले के दौरान किसी तरह की हलचल नहीं हुई और पूरा माहौल गंभीर बना रहा।

ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपी दोषी करार

अदालत ने इस मामले में कुल 11 आरोपितों पर फैसला सुनाया। इनमें से पांच आरोपितों को दोषी ठहराया गया जबकि अन्य के संबंध में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना निर्णय दिया।

दोषी करार दिए गए लोगों में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन का नाम भी शामिल है।

फैसला सुनाए जाने के दौरान ताहिर हुसैन भावुक हो गए। अदालत में मौजूद लोगों के अनुसार, अपना नाम दोषियों की सूची में सुनते ही वह रो पड़े। उनके साथ मौजूद अन्य दोषी भी भावुक नजर आए।

अब अदालत अगली सुनवाई में दोषियों की सजा पर निर्णय सुनाएगी।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़ा है।

आरोप के अनुसार, 25 फरवरी 2020 को अंकित शर्मा अपने चांद बाग स्थित घर से बाहर निकले थे। इसी दौरान हिंसक भीड़ ने उन्हें घेर लिया।

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि भीड़ उन्हें जबरन अपने साथ ले गई और बाद में चांद बाग पुलिया के पास चाकू, लोहे की सरिया और डंडों से हमला कर उनकी हत्या कर दी।

अगले दिन उनका शव खजूरी खास इलाके के एक नाले से बरामद हुआ था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बढ़ाई थी गंभीरता

अंकित शर्मा के शव का पोस्टमार्टम होने के बाद मामला और गंभीर हो गया था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर 50 से अधिक चोटों का उल्लेख किया गया था। जांच एजेंसियों ने इसे बेहद गंभीर हत्या का मामला मानते हुए विस्तृत जांच शुरू की।

मामले में अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया।

कैसे आगे बढ़ी जांच?

घटना के बाद शुरुआती जांच दिल्ली पुलिस ने की।

बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई।

जांच एजेंसियों ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा, गवाहों के बयान और अन्य तकनीकी प्रमाणों के आधार पर आरोपितों की पहचान की।

इसके बाद जून और जुलाई 2020 के दौरान ताहिर हुसैन सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया।

सितंबर 2020 में क्राइम ब्रांच ने अदालत में विस्तृत चार्जशीट दाखिल की।

पांच वर्षों तक चली अदालत में सुनवाई

वर्ष 2021 में अदालत ने आरोप तय किए और मुकदमे की नियमित सुनवाई शुरू हुई।

इसके बाद कई वर्षों तक अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच गवाहों की जिरह, दस्तावेजों की जांच और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं चलती रहीं।

अदालत ने बड़ी संख्या में गवाहों के बयान दर्ज किए तथा डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों की भी समीक्षा की।

वर्ष 2025 में दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें पूरी हुईं।

इसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

समयरेखा: कब क्या हुआ?

23 फरवरी 2020

जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में प्रदर्शन शुरू हुआ।

24 फरवरी 2020

मौजपुर और जाफराबाद क्षेत्र में दो समूहों के बीच हिंसा और पथराव शुरू हुआ।

25 फरवरी 2020

आईबी अधिकारी अंकित शर्मा घर से निकले और बाद में लापता हो गए।

26 फरवरी 2020

खजूरी खास नाले से उनका शव बरामद हुआ।

मार्च–जून 2020

दिल्ली पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद मामला क्राइम ब्रांच को सौंपा।

सितंबर 2020

चार्जशीट अदालत में दाखिल की गई।

2021–2025

मामले की नियमित सुनवाई, गवाहों के बयान और अंतिम बहस पूरी हुई।

13 जुलाई 2026

कड़कड़डूमा कोर्ट ने ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपितों को दोषी करार दिया।

अब आगे क्या होगा?

दोषसिद्धि के बाद अब अदालत अगली सुनवाई में दोषियों की सजा तय करेगी।

सजा तय करते समय अदालत अपराध की प्रकृति, उपलब्ध साक्ष्यों, अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों सहित विभिन्न कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी।

यदि दोषी पक्ष फैसले से असंतुष्ट होता है, तो उसे उच्च न्यायालय में अपील करने का कानूनी अधिकार भी प्राप्त रहेगा।

राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर भी नजर

यह मामला शुरुआत से ही राजनीतिक रूप से भी चर्चा में रहा है क्योंकि इसमें एक पूर्व जनप्रतिनिधि का नाम शामिल रहा।

फैसले के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं पर भी लोगों की नजर बनी हुई है। हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत का निर्णय केवल प्रस्तुत साक्ष्यों और कानून के आधार पर दिया जाता है।

आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में लगभग छह वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद कड़कड़डूमा कोर्ट ने ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपितों को दोषी करार दिया है। यह फैसला उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक में आया है। अब अगला महत्वपूर्ण चरण दोषियों की सजा का निर्धारण होगा, जिसके बाद आवश्यकता पड़ने पर उच्च अदालतों में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। अदालत के इस फैसले ने एक बार फिर वर्ष 2020 के उन घटनाक्रमों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है, जिन्होंने देश की राजनीति और कानून-व्यवस्था पर गहरा प्रभाव छोड़ा था।

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